थानेश्वर महादेव के आशीर्वाद से मिलता हैं सन्तान सुख

जयन्त प्रतिनिधि, कल्जीखाल। यूं तो उत्तराखण्ड के क ण-क ण में देवताओं का वास हैं इसीलिए उत्तराखण्ड को देवभूमि क हा जाता है। यही कारण है कि इस देवभूमि में क ण-क ण मे शक्तिपीठ एवं शिवालय विद्यमान है। इन्ही में से एक पौड़ी जनपद के मनियारस्यूं पट्टी के थनुल गांव स्थित सिद्धपीठ थानेश्वर महादेव मंदिर भी है। इस सिद्धपीठ का इतिहास सदियों पुराना है। माना जाता हैं कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं आदि गुरू शंक राचार्य द्वारा की गयी थी। मन्दिर की बनावट गुप्तकालीन कला से मेल खाती हैं। मन्दिर समिति के धार्मिक एवं सांस्कृ तिक सचिव सुदामा प्रसाद क वटियाल बताते है कि इस पवित्र स्थल व शिवालय का वर्णन केदारखण्ड में भी कि या गया हैं। जानकर बताते है कि मूल रू प से इस मंदिर की स्थापना थनगढ़ नदी के उत्तरी छोर पर स्थित महादेव सैंण नामक स्थान पर की गयीं थी जिसे कालांतर में नदी के दक्षिण छोर पर स्थित थनुल गांव की सीमा पर स्थित सुरम्य स्थान पर प्रतिस्थापित क र दिया गया। जिसे बाद में थानेश्वर महादेव के नाम से पुकारा जाने लगा। प्रक ति के सुरम्य अंक में अवस्थित थानेशवर महादेव मंदिर न केवल तीर्थाटन बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी काफी समृद्ध हैं। इतना ही नहीं शिव भक्तों का मानना हैं कि इस स्थान पर भगवान भोले शंक र के सानिध्य का अनुभूति होती है। वैसे तो यहां हर वक्त नवदम्पति चतुदर्शी एवं सोमवार को जलाभिषेक क र मनन्त मांगने आते हैं। यहां पर बैकुंठ चतुर्दर्शी को प्रतिवर्ष मेला लगता हैं। उस दिन नि:सन्तान दम्पतियों द्वारा सन्तान प्राप्ति को लेक र रात भर दीप जलाक र शिव आराधना की जाती है। जिससे उन्हें सन्तान प्राप्त होती हैं। यहां पहुंचने के लिए बनेख से थनुल गांव तक सड़क मार्ग से उसके बाद मन्दिर तक एक कि लोमीटर पैदल दूरी तय क रनी पड़ती हैं। वही ब्यासचट्टी बादियूं-जखनोली-चौण्डली तक सड़क मार्ग से फि र एक कि लोमीटर की मन्दिर तक की दूरी पैदल ही तय क रनी पड़ती है। हालांकि चौण्डली से 8 किलोमीटर सड़क विस्तारीक रण होते हुए मन्दिर होते हुए कि स्मोलिया- कुंक ली -महादेव सैन से जुड़ना था। जो पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की घोषणा थी लेकि न उक्त सड़क को आज तक वित्तीय स्वीकृ ति नहीं मिली जबकि इसी घोषणा के साथ आलसु-कोटाकुंक ली-बड़कोट-कांसखेत 10 कि लोमीटर सड़क का कार्य लगभग पूर्ण होने वाला है।

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