सत्ता के संघर्ष का साल

वर्ष 2018 की विदाई की हो चुकी है, एक ऐसा साल जो सत्ता के गलियारों में कई उतार-चढाव दे गया तो नवागंतुक 2019 भी हलचल मचाने की तैयारीे में है। देश में यह साल चुनावी साल साबित होने वाला है। भाजपा एवं कांग्रेस दोनों संगठन एवं सरकार को मजबूत बनाने की जुगत में लग गए हैं। भाजपा को अपने मिशन 2019 में सत्ता की चाबी को अपने पास रखना है तो वहीं कांगे्रेस तीन राज्यों में अभूतपूर्व सफलता के बाद उत्साह से लबारेज है। नि:संदेश 2019 के चुनाव परिणाम हैरत में डालने वाले होंगे क्योंकि वर्ष 2018 मोदी लहर के उफान पर ठंडे पानी के छींटे डाल कर गया जिससे भाजपा कुछ तो हिल ही गयी है। सीधे तौर पर 2019 के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एवं सरकार द्वारा लिए गए कुछ खास निर्णयों का रिपोर्ट कार्ड भी साबित होने वाला है। भाजपा की सीधी नजर मिशन 2019 पर है और इसके लिए सबसे बड़ी बाधा कहीं न कहीं इस बार विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बन सकता है। हालांकि गठबंधन को लेकर तमाम तरह के राजनीतिक स्टंट भी सामने आ रहे हैं लेकिन 2019 में अलायंस दल बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में आने वाले हैं, फिर चाहे वह भाजपा के खेमे के हों या फिर कांग्रेस के। मोदी की नीतियों जहां पहले आंखें बंद कर मौन स्वीकृति दी जाती थी वहीं अब जनता कई फैसलों को सही नहीं मानती। इसका असर विधानसभा चुनावों में देखने को मिला है। तीन राज्यों में मिली हार के बाद जीएसटी के दायरे से कुछ उत्पादों को बाहर करने के पीछे भी चुनाव परिणामों को माना जा रहा है। 2019 केंद्र सरकार से 2014 में किए गए वादों का हिसाब भी मांगेगा। नौकरियां, आतंकवाद का जड़ से सफाया, भ्रष्टाचार, कालाधन एवं दूसरे कई ऐसे वादे हैं जिन पर मोदी सरकार पूरी तरह से कसौटियों पर अभी भी जनता के आगे पूर्णतया खरी नहीं उतर पाई है। घोषणा को महज राजनेता की घोषणा के तौर पर ही देखा जा सकता है। पूरे देश में भाजपा बनाम कांग्रेस के बीच सत्ता का संघर्ष देखने को मिलेगा। इस लड़ाई मेंं कौन आगे रहेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन रणनीति का दौर तो शुरू हो ही गया है। दोनों ही दलों को यह तय करना है कि कैसे सत्ता के चरम पर पहुंचा जाए। भाजपा दुबारा सत्ता में आने के लिए प्रयासरत है लेकिन कांग्रेस अपनी ताकत को मजबूत बनाने में जुटी है और हर हाल में सत्ता की चाबी अपने पास रखने का प्रयास करेगी। मोदी-शाह के लिए राह इतनी आसान नहंी है, उस पर महज मोदी लहर के भरोसे अब लोकसभा चुनाव लड़ने से इतर भी कुछ भाजपा एवं सहयोगी पार्टियों का सोचना ही होगा। प्रतीक्षा तो केवल इस बात की है कि कांग्रेस या भाजपा? जनता किसको अपनाती है और किस को ठुकराती है। जाहिर तौर पर जनता विकास की गति को भी देखेगी, यही कारण है कि चुनाव से पूर्व कई ऐसे परिवर्तन भी देखने को मिल रहे हैं जिन पर केंद्र सरकार ने आम जनता को हाशिए पर डाला हुआ था। बस अब कुछ दिन और, 2019 का आगाज हो चुका है और इस साल महासंग्राम के बिगुल बजने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है ।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.