सबूत सार्वजनिक करे विपक्ष

उत्तराखंड के अंदर जिस प्रकार से स्टिंग को लेकर मामले सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि इस प्रदेश में मंत्रियों एवं अधिकारियों की पोल खोलना बेहद आसान ही नहीं है बल्कि यह लोग इस तरह से भ्रष्टाचार एवं अनैकिताओं में डूबे हुए हैं कि जहां-तहां इनके स्टिंग हो रहे हैं। लगता ही नहीं कि उत्तराखंड बनने के बाद यहां कोई आदर्श सरकार बनी हो जिसके नेता एवं अधिकारी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे से भयभीत नजर आए हों। हाल ही एक समाचार चैनल के मालिक को स्टिंग के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है जो कि अब जमानत पर बाहर हैं। इस मामले में भी वरिष्ठ आईएएस के स्टिंग को करने की योजना थी, लेकिन सरकार पहले ही इसे भांप गयी। समाचार चैनल में ही काम करने वाले एक कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस ने चैनल के सीईओ को गिरफ्तार किया लेकिन मजबूत केस नहीं बना सकी। इधर स्टिंग पर एक बार फिर से प्रदेश के अंदर घमासान एवं चर्चाएं उफान पर हैं। इस बार पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने मंत्रियों एवं अधिकारियों के स्टिंग अपने पास होने का दावा किया, लेकिन उन्होंने यह कह कर इन स्टिंग का खुलासा करने से मना कर दिया कि प्रदेश में लोकायुक्त होता तो वह इन स्टिंग को उन्हें सौंप देती। डॉ. हृदयेश ने इस बयान से एक तरफ तो सनसनी फैलाने का प्रयास किया तो दूसरी तरफ स्टिंग पेश न करने की बात कह कर अपनी ही बात को कुछ हद तक हल्का कर लिया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में प्रकाश में आए चैनल के स्टिंग मामले से जुड़े लोगों ने उन्हें यह स्टिंग दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष के पास यदि प्रदेश के अधिकारियों एवं मंत्रियों के भ्रष्टाचार से जुड़े स्टिंग हैं तो उन्हें इन्हें जनता के सामने रखने चाहिए। कम से कम प्रदेश की जनता भी तो देख कि जिन मंत्रियों के कार्यालयोंं एवं घरों में उनके घुसने की इजाजत नहीं हैं वहां कैसे भ्रष्टाचार आकंठ अपना कब्जा जमा चुका है। प्रदेश के विकास की फाईल दौड़ाने वाले अफसरों ने उत्तराखंड को किस प्रकार से कंगाल बना दिया है। मंत्रियों एवं अफसरों के भ्रष्टाचार की सूची सबके पास है लेकिन दिखाना कोई नहीं चाहता। यह बेहद विकट स्थिति है इस प्रदेश के लिए। नेता प्रतिपक्ष के पास यदि वाकई वर्तमान सरकार के मंत्रियों एवं अधिकारियों के भ्रष्टाचार से जुड़े स्टिंग हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में नानुकुर क्यों ? क्या विपक्ष भी केवल हंगामे की सनसनी बनाए रखना चाहता है या फिर केवल सरकार को कच्ची घुड़की दी जा रही है। विपक्ष की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि भ्रष्टाचार में डूबी सरकारी मशीनरी को बेनकाब करे, अन्यथा इस प्रकार के गुमराह करने वाले बयानों की कोई अहमियत नहीं है।

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