पत्थरबाजों पर रहम नहीं

कश्मीर में पत्थरबाजों से अब सख्ती से निपटा जाना चाहिए। मुठभेड़ के दौरान कश्मीर के युवाओं को सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने के लिए प्रायोजित किया जाता है। हैरानी इस बात की है कि वोटों के लोभ में कश्मीर के नेता पत्थरबाजी को देश के लिए किया जाने वाला कृत्य बताते आए हैं। यह चिंता स्वाभाविक है कि इस्लामिक आतंकवाद एक बड़ी मुीसबत बन रहा है। भारत तो पहले से ही पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को झेलता आ रहा है तो अब इस्लामिक का खतरा मंडराने लगा है। संभावनाएं हैं कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान आतंकी संगठनों को प्लेटफार्म उपलब्ध करा सकता है। इस्लाििमक स्टेट एवं कश्मीर के नाम पर जिस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं उसने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े परिवर्तन की संभावनाओं को जन्म दे दिया है। आतंकी संगठन प्रलोभनों एवं जेहाद के नाम पर युवाओें को गुमराह कर रहे हैं तथा इंटरनेट के मायम से ऐसे कुछ युवा आईएस से जुड़ने का रास्ता अपना रहे है। प्रदेश भर की पुलिस के लिए यह अब जरूरी हो गया कि उनके काम की जिम्मेदारियां केवल स्थानीय अपराधें को रोकने तक ही सीमित नहीं है बल्कि जिम्मेदारियों का दायरा अब कहीं बढ गया है। हर जिम्मेदारियां केवल सेना या अद्र्घसैनिक बलों तक ही सीमित नहीं की जा सकती हैं, राज्यों की पुलिस को भी अपने नेटवर्क एवं काम करने के तरीकों पर बदलाव लाना होगा ओर खुद को ऐसी परिस्थितियों से जूझने के लिए तैयार करना होगा। प्रदेश पुलिस के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह ऐसे युवाओं की पहचान करें जो कि इन अलगाववादी संगठनों के संपर्क में आ रह हैं। पाक समर्थित आतंकवाद का कई बार खुलासा हो चुका है। जिंदा आतंकवादी भारत के हाथ लगा है जिसने कई राज खोले हैं लेकिन पाकिस्तान हर बार की तरह इस बार भी उसे अपना नागरिक मानने को ही तैयार नहीं है। पूरा विश्व जनता है कि भारत विरोधी आतंकी घटनाओं का का सारा ताना बुना पाकिस्तान से तैयार किया जाता है। देश में प्रदेशों की पुलिस अभी इतनी सशक्त नहंी हो पाई है कि वह सीध्ो आतंकवादियों से लोहा ले सकें। इसके लिए प्रदेश पुलिस को तकनीक एवं युद्घ कौशल का कड़ा प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। सबसे बड़ी चिंता प्रदेशों की पुलिस में खुफिया तंत्र को लेकर है जो अक्सर खास मौकों पर फेलियर ही साबित होता आया है। असल में सबसे बड़ी दिक्कत तो यहां आती है कि पुरानी घटनाओं से प्रदेश पुलिस सबक लेने को तैयार नहीं होतीं। सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने वालों पर तो सख्ती से कार्रवाई होनी ही चाहिए, साथ ही इन्हेंं प्रेरित एवं फंडिंग करने वालों पर भी देश द्रोह का चाबुक बरसना चाहिए और रहम की तो कोई गुंजाईश ही नहीं होनी चाहिए।

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