एनएचएआई फास्टैग पर तेल कंपनियों के साथ मिलकर करेगा काम

ई-टोल संग्रह प्रणाली का लक्ष्य हासिल करने पर होगा करार
नई दिल्ली, एजेन्सी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पेट्रोलियम खुदरा दुकानों के माध्यम से फास्टैेग्स को जारी करने के लिए तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर कार्य करेगा।
केंद्र सरकार ने टोल प्लाजाओं पर ई-टोल संग्रह प्रणाली के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब फास्टेग्स की आसान उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए नया कदम उठाया है। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा प्रवर्तित कंपनी भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) 7 जनवरी 2019 को राज्य सरकार द्वारा संचालित तेल विपणन कंपनियों (आईओसीएल,बीपीसी और एचपीसी) के साथ एक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर रही है। इस समझौते से भारत भर के पेट्रोलियम विक्रय केन्द्रों पर फास्टटेग्स की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सकेगा। पहले चरण में, यह टैग दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 50 तेल स्टेशनों पर उपलब्ध होंगे, इसके बाद इन्हें सम्पूर्ण भारत के विक्रय केन्द्रों में विस्तारित किया जाएगा। आईएचएमसीएल को देश में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम (एनईटीसी) को लागू करने के लिए अधिकृत किया गया है। कंपनी ने अप्रैल 2016 में ष्फास्टैगष् ब्रांड के तहत इस कार्यक्रम का शुभांरभ किया था। इस कार्यक्रम ने पिछले वर्षों में शानदार सफलता हासिल की और अब यह राष्ट्रीय राजमार्गों और चयनित 450 से अधिक टोल प्लाजाओं पर संचालन में हैं। वर्तमान एनईटीसी कार्यक्रम में, फास्टटेग्स को प्रमाणित बैंकों द्वारा कुछ सीमित माध्यमों जैसे एनएच टोल प्लाजा पर प्वाइंट-ऑफ-सेल, ऑनलाइन और चयनित बैंक शाखाओं के माध्यम से जारी किया जा रहा हैं। सरकार के हाल के उपायों जैसे भारत के सभी टोल प्लाजाओँ में प्रस्तावित फास्टटेग्स-जीएसटी एकीकरण और फास्टटेग्स स्वीकृति जैसे विपणन माध्यमों को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। ये समझौता ज्ञापन विकसित बाजार की उम्मीदों को पूरा करने में आईएचएमसीएल की सहायता करेगा।
ये उपाय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को एक सुरक्षित, सुचारू और निर्बाध यात्रा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने में मदद करेंगे। फास्टटेग्स कार्यक्रम के विस्तार से प्लाजा में निर्बाध टोल-शुल्क भुगतान सुविधा के साथ साथ धन और ईंधन की बचत होगी। ऑनलाइन भुगतान से टोल लेन-देन की पारदर्शिता में सुधार होगा, राजस्व के नुकसान में कमी आयेगी और समग्र दक्षता और वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा।
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