हाईड्रम खराब होने से 85 गांवों में सिंचाई ठप

संवाददाता, अल्मोड़ा। जिले में हाईड्रम खराब होने से 85 गांवों में सिंचाई ठप हो गई है। इस कारण काश्तकारों को खेतीबाड़ी करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में केंद्र सरकार की वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की योजना पर ब्रेक लगता दिख रहा है। विलुप्त होते सिंचाई के साधन मेहनतकश किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। इससे किसानों का खेती करना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की कवायद कर रही है। इसके लिए बार-बार जिला, राज्य व केंद्र स्तर पर बैठकें भी हो रही हैं, लेकिन पहाड़ में शासन स्तर से बजट नहीं मिलने के कारण सिंचाई के साधन ही अस्तित्व खोने लगे हैं। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करना तो दूर, खेतों को बंजर होने से बचाना ही बड़ी चुनौती है। जिले में कुल 95 सिंचाई हाईड्रम योजना स्थापित की गई हैं। इसमें 52 सिंचाई हाईड्रम खराब पड़े हैं। 33 हाईड्रम ऐसे हैं, जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन्हें चला पाना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। जिले में 95 हाईड्रम में से वर्तमान में केवल 10 सिंचाई हाईड्रम ही आंशिक रूप से चल रहे हैं। एक सिंचाई हाईड्रम योजना से करीब 10 से 20 काश्तकार खेतों की सिंचाई करते थे। लेकिन वर्तमान में सिंचाई हाईड्रम खराब होने से करीब 1500 काश्तकारों को खेती करना मुश्किल हो गया है। वह कई बार इनको दुरुस्त करने की मांग उठा चुके हैं। लघु सिंचाई विभाग में शासन स्तर से निर्माण कार्यों व मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने के कारण विभाग के काम ठप पड़े हैं। सिंचाई विभाग के जिले में 30 कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन किसी भी कार्य के लिए बजट नहीं मिलने के कारण कर्मचारी के पास भी काम नहीं है। जिले में इस बार निर्माण व मरम्मत कार्य के लिए लघु सिंचाई विभाग को जिला योजना से केवल 10 लाख 97 हजार रुपये का ही बजट मिल पाया है। इससे पांच ब्लॉकों में केवल छह गूल व मरम्मत का ही कार्य चल पाया है। जिले में 95 सिंचाई हाईड्रम हैं। इसमें 10 हाईड्रम आंशिक रूप से चल रहे हैं। जबकि 52 क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद पड़े हैं। 33 सिंचाई हाईड्रम बहुत ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जो चलने लायक ही नहीं हैं। बजट नहीं मिलने के कारण क्षतिग्रस्त हाईड्रम ठीक करना मुश्किल हो गया है।

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