बारिश न होने से गेहूं की बुआई पर संकट

संवाददाता, नई टिहरी। लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्रखंड में कई जगह ग्रामीण गेहूं की बुआई नहीं कर पाए। र्अंसचित खेती में तो बुआई का सही समय ही निकल गया है, जिससे काश्तकार्र ंचतित हैं।
प्रखंड की हेंवलघाटी, चंबा-मसूरी फलपट्टी, नकोट, उदयकोट आदि क्षेत्रों में ग्रामीण गेहूं की बुआई नहीं कर पाए हैं। बिना बारिश के खेतों की मिट्टी इतनी सख्त हो गई कि ग्रामीण हल नहीं लगा पाए, जिससे खेतों में गेहूं की बुआई नहीं हो सकीर्। ंचताजनक बात यह है कि र्अंसचित खेती में गेहूं की बुआई का सही समय बीत चुका है। किसार्न ंचतित हैं कि वे गेहूं की बुआई नहीं कर पाए और अब आगे बुआई हो भी नहीं हो सकती है। कुछ जगह घाटियों में जर्हां ंसचाई की सुविधा है, वहीं गेहूं की बुआई चल रही है। बताते चलें कि बरसात के सीजन के बाद से अब तक बारिश नहीं हुई है, खेतों की नमी खत्म हो गई है और मिट्टी सख्त हो रखी है। र्अंसचित खेती में नवंबर के मध्य तक गेहूं की बुआई हो जाती थी। जहां खेतों में नमी थी, वहां तो लोगों ने बुआई कर दी, लेकिन जहां खेत सख्त थे, वहां किसान इस इंतजार में थे कि बारिश हो तो बुआई करें। लेकिन, बारिश अभी तक नहीं हुई है, जिससे काश्तकार्र ंचतित हैं। नागणी के काश्तकार विक्रर्म ंसह और भगवार्न ंसह आदि का कहना है कि गेहूं की बुआई का सीजन जा चुका है। एक फसल का नुकसान हो गया है, अब आगे क्या उम्मीद करें। उनका कहना है कि संबंधित कृषि व उद्यान विभाग को क्षेत्र का दौरा करना चाहिए। इस बारे में सहायक कृषि अधिकारी डीपी सेमल्टी का कहना है कि र्अंसचित खेती में गेहूं की बुआई का समय बीत चुका है। अब बुआई करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने बताया कि असिंचित खेती में 15 दिसंबर तक गेहूं की बुआई कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिन खेतों में गेहूं की फसल उग गई है, वहां पहर्ली ंसचाई कर दें और खरपतवारों की रोकथाम के लिए 2-4 डी दवा का छिड़काव करें।

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